#Unnao_News : कलियुग में केवल नाम ही आधार है भवसागर पार करने के लिए
पावनधाम कुटीबीर बाबा मे कलश यात्रा के साथ शुरू हुई रामकथा
श्री रामजानकी टाइम्स/अनुज शुक्ला
असोहा। पावनधाम कुटीबीर बाबा मे कलश यात्रा के साथ कल से नव दिवसीय मानस वेदांत संत सम्मेलन प्रारम्भ हो गया। कथावाचक प्रयाग से आए राघवाचार्य ने कहा कि मन की सनुकुलता ही सुख है, मन की प्रतिकूलता ही दु:ख है। इस लिए जरूरी है कि मन को अपने वश मे रखे, उन्होंने कहा कि संसार में रह कर जब तक जीव अपनी अलोकिक कामनाओं का त्याग नहीं करता है तब तक उसे शांति नहीं मिल सकती है और यदि इच्छा ही करनी है तो ईश्वर भक्ति की इच्छा करनी चाहिए जिससे इंह लोक और परलोक दोनों बनता है।
दूसरी इच्छाएं तो दु:ख की जननी है। उन्होंने ने कहा कि भगवत कथा के दिव्य ज्ञान के बिना स्वर्ग भी दु:ख मय है। अंध भक्त से नहीं ज्ञानम य भक्ति से सच्चे वैराग्य कि उत्पप्ती होती है, आगे कहा कि भागवत कथा जीवन जीने की कला है और कर्तव्य पथ पर चलते पर लोक की यात्रा सुधार देती है।
कथा के दौरान चंद्र नारायण अवस्थी, रीतेश, विंदा पाण्डे, सुधीर त्रिपाठी पूर्व प्रधान कांथा, अर्पित शुक्ल, आशीष पाण्डे, अनिल राजपूत, ओम प्रकाश त्रिवेदी, नरेंद्र पाण्डेय, शिवम तिवारी भगवन्तनगर, लकी भट्ट, रामू मिश्रा, मयंक मिश्रा, विनोद शुक्ला, प्पन, गुड्डू पाल, सुनील रावत, नन्द किशोर,सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे ।
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