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#Unnao_News : हेड मास्टर हैं तो क्या हुआ हैं तो सरकारी दामाद ही

 

विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हालत में है कहीं फर्श टूटी, कहीं स्लैब
तो कहीं दरवाजा ही नहीं है।
क्या होगा शिक्षा व्यवस्था का और कब ऐसे लोगों के ऊपर अधिकारियों की नजरें इनायत होंगी।

श्री रामजानकी टाइम्स उन्नाव/सन्तोष अवस्थी 

उन्नाव। मोदी योगी की सरकार जहाँ एक ओर बच्चों की शिक्षा के लिए कमर कसे हुए है तो दूसरी तरफ ऐसे अध्यापक भी हैं जोसरकार की योजनाओं में पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते।


पूरा मामला जनपद उन्नाव में विकास खण्ड मियागंज के ग्राम भखरा खेड़ा का है।जहाँ के प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर अवधेश वर्मा का हाल यह है कि वह 15 से 20 दिनो में विद्यालय जाते हैं और वह भी विद्यालय बंद होने के बाद रसोइये से चाभी लेकर पूरे दिनों की हाजिरी लगाकर वापस आ जाते हैं, स्कूल के बच्चों को शायद अपने हेडमास्टर साहब की शक्ल ही न मालूम हो।

अवधेश वर्मा जैसे शिक्षक क्या बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पायेंगे और क्या उनकी नींव मजबूत होगी।गरीब आदमी जो मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजता है कि उसका बच्चा पढ़ लिख कर कुछ योग्य बन जायेगा लेकिन अवधेश वर्मा जैसे शिक्षक उनकी आशाओं पर पानी फेर रहें हैं।क्या वह अपने बच्चों के साथ भी ऐसा करते होंगे।वेतन 70000से ऊपर और उन्नाव में बड़े चौराहे पर अमर बुक डिपो के नाम से दुकान तो क्या पड़ी है विद्यालय जाने की।सरकारी दामाद जो ठहरे।

विद्यालय में मिड डे मील का हाल यह है कि रसोइये के होते हुए कोई भी चीज उपलब्ध नहीं है जिससे शासन की मंशा के अनुरूप और नियमों के तहत बच्चों को भोजन मिल सके लेकिन क्या पड़ी है जब खुद का पेट हर तरफ से भरा हुआ हो।स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर तैनात संत कुमार द्विवेदी अपने पैसों से बच्चों के लिए खाने पीने का इंतजाम करते रहते हैं कभी फल तो कभी कुछ और।




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