18 साल से शहीद का परिवार लगा रहा दफ्तरों के चक्कर
अनिश्चित कालीन धरने पर बैठा परिवार
श्री रामजानकी टाइम्स
लखनऊ। देश सेवा में जान न्योछावर करने वाले विवेक सक्सेना के परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है। 18 वर्षों से इंसाफ के इंतजार में दफ्तरों के चक्कर काटने वाला परिवार अब अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गया है।
आपको बता दें कि सरोजनीनगर के दरोगाखेड़ा स्थित कृष्णलोक कालोनी में रहने वाले विवेक सक्सेना को चार जनवरी 1999 को इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनाती मिली थी। इसके बाद 22 जनवरी 2000 को वह सीमा सुरक्षा बल में शामिल हो गए थे। विवेक ने मणिपुर में तैनाती के दौरान कई बार आतंकवादियों से मोर्चा लिया। आतंकियों को ढेर करने के बाद विवेक खतरों के खिलाड़ी नाम प्रसिद्ध हो गए। 2003 को दो जनवरी को मणिपुर में उपद्रवियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हो गए। मरणोपरांत अशोक चक्र दिया गया। लेकिन परिवार के अनुसार शहीद विवेक के नाम पर सिर्फ पेंशन ही मिल रही है। उनको एक मुश्त धनराशि, जमीन आवंटन, सरकारी नौकरी, मणिपुर सरकार द्वारा मिलने वाला मुआवजा अभी तक नहीं मिला है।
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