लगातार संक्रामक रोगों के मरीजों में हो रहा इजाफा, दवाओं की होने लगी किल्लत
एक माह के अंदर दो लाख से अधिक गोलियों का हुआ वितरण
Shri Ramjanki Times
इनमें सबसे अधिक मरीज बुखार व संक्रामक रोग के हैं। अधिकतर मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि मरीजों को बेड भी नसीब नहीं हो रहा हैं। एक बेड पर दो से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की माने तो जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से दो हजार मरीजों की ओपीडी हो रही है। मरीजों की संख्या बढ़ने से दवाओं की खपत बढ़ गई है। सबसे अधिक डिमांड बुखार में प्रयोग होने वाली पैरासिटामॉल, डाइक्लोफेनिक, एंटीबायोटिक दवाओं की हैं। पैरासिटामॉल टेबलेट, एंटीबायोटिक, बच्चों के सिरप, ओआरएस, पैरासिटामॉल सिरप व पेट से संबंधित तकलीफों की दवाएं। जिला अस्पताल के दवा वितरण कक्ष में दो दिन में 3300 मरीजों की दवा पर्ची पहुंची। अस्पताल प्रशासन के अनुसार 13 सितंबर को सबसे अधिक 2100 पर्चियां आई थीं।
जबकि बुधवार को 1125 मरीजों की पर्चियां आईं। चीफ फार्मासिस्ट के अनुसार अधिकतर मरीज बुखार व संक्रामक रोग के आ रहे हैं। जिन्हें पैरासिटामॉल, एंटीबायोटिक, डाइक्लोफेनिक और मेट्रोजिल सिरप जैसी दवाएं दी जा रही हैं। प्रतिदिन छह हजार से अधिक पैरासिटामॉल की टेबलेट का वितरण किया जा रहा है। जबकि तीन से पांच हजार तक एंटीबायोटिक, डाइक्लोफेनिक टेबलेट वितरित की जा रही है। दवा वितरण कक्ष के कर्मियों के अनुसार सितंबर माह में दवाओं की डिमांड तीन गुना तक पहुंच गई है। ऐसे में भविष्य में दवाओं की किल्लत से बचने के लिए अभी से आर्डर भेज दिए गए हैं। बुखार के मरीजों की संख्या अधिक होने से सबसे अधिक पैरासिटामॉल टेबलेट और सिरप की मांग है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने एक लाख अतिरिक्त पैरासिटामॉल टेबलेट मांगी है। मांग के आधार पर अस्पताल को दवाओं की आपूर्ति की जा रही है।

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