प्रधानों व पंचायत सचिवों के लिए बवाले जान, बना सरकार का नया फरमान
अधिकांश पंचायत सहायकों को भी नही है कम्प्यूटर ज्ञान
अभी भी पंचायतों में नही हैं कम्प्यूटर
Shri Ramjanki Timesबछरावां -रायबरेली। प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में कंप्यूटर आदि उपलब्ध कराने के बाद एक आदेश जारी कर दिया गया, कि अब ग्राम पंचायतें अपने यहां होने वाले कार्यों में क्रय की गई सामग्रियों का भुगतान पंचायत सचिवालय अथवा पंचायत भवन से ही कर सकेंगे।इसके लिए ग्राम सभा की लोकेशन निर्धारित कर दी गई। इसके पहले प्रावधान यह था कि पंचायत सचिव तथा प्रधान किसी भी कंप्यूटर से भुगतान लगा देते थे। और व्यापारी को प्राप्त हो जाता था। इस फरमान के बाद ग्राम पंचायतों के सामने भयंकर दिक्कतें आ गई हैं क्योंकि बहुत सी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन अथवा सचिवालय बने ही नहीं हैं।कुछ ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं।जिनमें निर्मित पंचायत भवन इतना जर्जर हो चुके हैं कि उसमें बैठना मौत को दावत देना है।
इसके अलावा अधिकांश ग्राम पंचायतो में पंचायत भवन अथवा सचिवालय गांव के बाहर बने हुए हैं। जिनमें कंप्यूटर आदि के सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। बछरावां विकासखंड की ग्राम सभा रैन में जैसे ही कंप्यूटर आदि लगाए गए इनके लगने के 2 दिन बाद ही अज्ञात चोरों द्वारा कंप्यूटर सीपीयू, सीसीटीवी कैमरा, तथा इनवर्टर बैटरी यहां तक कि पूर्व प्रधान के कार्यकाल में खरीदी गई कुर्सियां भी चोरों ने पार कर दी। थाने में एफ आई आर दर्ज कराई गई।परंतु चोरों का कोई पता नहीं लगा। इस हादसे के बाद कई डरे हुए प्रधानों द्वारा यह सारा सामान अपने घरों पर सुरक्षित रखा गया। प्रधानों का कहना है कि अगर कंप्यूटर के बजाय लैपटॉप होता तो वह लोग उसे ले जाकर पंचायत घर में बैठ कर भुगतान आदि लगा देते। परंतु कंप्यूटर सीपीयू तथा बैटरी उसके साथ के अन्य उपकरण ग्राम पंचायत भवन तक रोज ले जाना एक समस्या बनी हुई है।
सरकार द्वारा एक काम और किया गया, वह यह कि प्रत्येक ग्राम सभा में पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई, प्रावधान यह रखा गया कि यह पंचायत सेवक ग्राम सभाओं का पूरा कार्य देखेंगे क्योंकि एक 1 ग्राम पंचायत अधिकारी के पास 4 से लेकर 6 ग्राम सभाओं तक की जिम्मेदारी है। जनपद के कुछ विकास खंडों में ग्राम पंचायत अधिकारी के पास 8 से 9 ग्राम सभाएं हैं। सवाल यह उठता है कि सप्ताह में 7 दिन ही होते हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी कब किस ग्राम सभा में पहुंचेगा और कब अन्य ग्राम सभा के कार्यों की देखभाल करेगा। सबसे बड़ी एक समस्या प्रधानों तथा पंचायत सचिवों के सामने यह आ रही है।
बहुत सी ग्राम सभाएं ऐसी हैं जहां नेटवर्क ही उपलब्ध नहीं है। इन स्थितियों में सरवर ना होने की वजह से भुगतान किस प्रकार किए जाएंगे यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। सरकार की अदूरदर्शिता का एक और उदाहरण ग्राम पंचायतों में देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव के पहले आनन फानन एक आदेश जारी किया गया। कि ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक नियुक्त किए जाएंगे, परंतु उनकी शैक्षिक योग्यता मात्र इंटर मांगी गई। जबकि सरकार का इरादा पूरी तरह सारे अभिलेखों को कंप्यूटराइज करना है।विडंबना यह है कि जो पंचायत सहायक नियुक्त हुए। इनमें अधिकांश को कंप्यूटर का ज्ञान न के बराबर है। इसमें दो राय नहीं है, कि सरकार की नियत बहुत साफ है, वह ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है। परंतु व्यवस्थाओं की कमी तथा सलाहकार तंत्र के चलते उसकी महत्वाकांक्षी योजना विफल हो रही है, और यह विफलता ग्राम पंचायत प्रधानों तथा उस में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए बवाले जान साबित हो रही।

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