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#Bijali_Sanaka_ : कोयले की आपूर्ति में बिजली क्षेत्र को दी जा रही है प्राथमिकता

  
कोयला आधिरित अन्य उद्योगों पर पड़ेगा यह प्रभाव

Shri Ramjanki Times

नयी दिल्ली। देश में कोयला संकट उद्योगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। कोयले की चुनिंदा बिक्री से उद्योगों पर बड़ी मार पड़ रही है। बिजली संकट के मद्देनजर कोयले की आपूर्ति के लिए बिजली क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे सीमेंट, स्टील, एल्यूमीनियम, तांबा और जिंक समेत तमाम धातुओं के कारखानों में उत्पादन घटने के साथ इनकी कीमतों में इजाफा होने लगा है।


बैंकों का एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण चढ़ जाएगा

संकट को देखते हुए कोल इंडिया ने गैर बिजली उत्पादकों को कोयले की आपूर्ति रोक दी है। इससे कई धातुओं की कीमत मेटल एक्सचेंज पर 13 साल के उच्तम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस बीच एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने आगाह किया कि एल्युमीनियम संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई तो इसके चलते आठ लाख से अधिक लोगों की नौकरी चली जाएगी। बैंकों का एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण चढ़ जाएगा और 90,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राष्ट्रीय विदेशी मुद्रा का नुकसान होगा।

 घर बनाना महंगा हुआ

ईंट भट्ठों वाले कोयले का भाव सात हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन से 22 हजार रुपये हो गया है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में ईंट भट्ठे इस सीजन में अभी तक नहीं चल सके हैं। इससे ईंट का भाव भी 1500 से 1700 रुपये तक बढ़ गया है।

 फ्रोजन फूड भी महंगा होगा

फ्रोजन फ्रूड उद्योग बिजली संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है। बिजली कटौती की स्थिति में यह उद्योग डीजल जनरेटर पर भरोसा कर सकता है, लेकिन डीजल महंगा होने से उनकी लागत काफी बढ़ जाएगी।

 ई-नीलामी रोकी

बिजली उत्पादन संयंत्रों में कोयले के कम भंडार के बीच कोल इंडिया ने अपनी सहायक कंपनियों से हालात सामान्य होने तक बिजली क्षेत्र के लिए विशेष फॉरवर्ड ई-नीलामी को छोड़कर कोयले की किसी भी तरह की ई-नीलामी आयोजित करने से परहेज करने को कहा है।

  

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