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#Lakhimpur_Kheri_News_CRIME : लखनऊ में अंकित दास के घर पुलिस की तलाश, हाथ लगा बड़ा सुराग

 


Shri Ramjanki Times

लखनऊ। लखीमपुर हिंसा में आरोपी अंकित दास के लखनऊ स्थित आवास से एसआईटी ने शुक्रवार को पिस्टल और रिपीटर गन बरामद कर ली। इन हथियारों को बरामद करने के लिए एसआईटी अंकित और उसके निजी गनर लतीफ को लेकर लखनऊ के हुसैनगंज में उसके घर पहुंची थी। बरामद पिस्टल का लाइसेंस अंकित और रिपीटर गन का लाइसेंस लतीफ के नाम बना हुआ है। एसआईटी ने एक होटल में भी छापा मारा जहां घटना के बाद दो दिन तक अंकित का रुकना बताया जा रहा है। इस बारे में एसआईटी के अधिकारी कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन लखनऊ में अभी एसआईटी कुछ और बिन्दुओं पर जांच करने के लिए रुकी हुई है।


एसआईटी के तीन अधिकारी छह लोगों की टीम के साथ हुसैनगंज स्थित क्ले स्क्वायर स्थित अंकित के घर पहुंचे थे। स्थानीय पुलिस को भी इस बारे में सूचना नहीं दी गई थी। यहां फिंगर प्रिन्ट एक्सपर्ट को भी ले जाया गया था। एक दिन पहले ही घटना के मुख्य आरोपी आशीष मिश्र और अंकित का घटनास्थल पर आमना-सामना कराया गया था। इसके बाद ही पता चला था कि घटना के समय अंकित के असलहे भी उसके पास थे। अंकित ने ही बताया कि ये असलहे उसके घर पर रखे हुए हैं। इस पर ही एसआईटी शुक्रवार को लखनऊ पहुंची थी। 

होटल में देर शाम हुई तलाशी 

एसआईटी ने गोखले मार्ग स्थित एक होटल में शुक्रवार देर शाम तलाशी ली। यहां के स्टाफ से पूछताछ की और अंकित के बारे में भी सवाल जवाब किया। यह होटल अंकित के बेहद करीबी रिश्तेदार का बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी को पता चला था कि घटना के बाद अंकित यहां दो दिन रुका था। इसके बाद ही वह नेपाल जाने के लिए निकला था। इस बीच ही उसका नाम सामने आ गया और एसआईटी ने उसके हुसैनगंज स्थित आवास पर नोटिस चस्पा कर दिया था। नोटिस चस्पा होने के बाद ही अंकित लखीमपुर में क्राइम ब्रांच के दफ्तर में एसआईटी को बयान देने के लिये पहुंच गया था। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी कर ली गई। 

एसआईटी ने जुटाए 39 वीडियो, सीसीटीवी फुटेज से भी ली मदद

लखीमपुर हिंसा मामले में पुलिस की विवेचना दिशा पकड़कर तेज हो चली है। पुलिस न सिर्फ गवाहों से केस मजबूत कर रही है, बल्कि इलेक्ट्रानिक सुबूतों पर भी काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने 39 वीडियो साक्ष्य एकत्र किए हैं। इनमें घटनास्थल के वीडियो से लेकर सीसीटीवी फुटेज भी शामिल है। पुलिस अभी भी इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों के संकलन में तेजी से लगी है। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल की अगुवाई में बनी जांच कमेटी हर बिंदु पर जांच करने में जुटी है। एक-एक कड़ी जोड़ी जा रही है। मौके पर मिले साक्ष्यों को अलग-अलग सूचीबद्ध किया जा रहा है। 

आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई जांच 

इलेक्ट्रानिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक/बैलिस्टिक जांच रिपोर्ट का अलग-अलग मिलान किया जा रहा है। इन साक्ष्यों का मिलान आरोपियों के दर्ज बयानों से कराया जा रहा है। जांच कमेटी ने आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद साक्ष्य संकलन का काम तेज कर दिया था। वायरल वीडियो के अलावा भी जांच कमेटी ने लोगों से वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की। नंबर जारी किए गए और पहचान गुप्त रखने का वादा किया गया। इसका असर हुआ। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पेट्रोल पंप, राइस मिल के वीडियो फुटेज लिए। यही नहीं, केंद्रीय मंत्री के गांव तक की दुकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज को एकत्र किया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इन वीडियो साक्ष्य से बहुत कुछ सामने आने लगा था। इसके बाद पुलिस ने दंगल में कार्यक्रम स्थल की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले से पूछताछ की। हालांकि अभी पुलिस इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कर रही है। इसके अलावा सीडीआर के जरिए भी पुलिस ने साक्ष्य संकलन के लिए काम किया। मोबाइलों की लोकेशन को भी एक मजबूत आधार बनाया। इसके बाद गवाही भी दर्ज की।  

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