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#Unnao_News : गरीबों का निवाला छीनकर पेट भर रहे गोदाम प्रभारी

गोदाम प्रभारियों के न रहने पर दिहाड़ी मजदूर संभालते हैं चार्ज
एसडीएम व गोदाम प्रभारियों की सांठगांठ से होता है घटतौली का खेल, सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली में हैं छेद ही छेद

Shri Ramjanki Times 

उन्नाव। विकास खंड स्तर पर संचालित गोदामों से लेकर कोटेदार की दुकान तक बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है। 50 किलो की बोरी 45 से 47 किलो की ही होती है। बीच का अनाज कहा जा रहा है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। भारतीय खाद्य निगम के इन गोदामों में कौन हेराफेरी कर रहा है और किसके इशारे पर कर रहा है यह एक बड़ा विषय है। गोदामों से लगभग 5किलोमीटर दूर धर्मकांटे पर तौल के बहाने घटतौली का खेल खेला जा रहा है जिससे जिम्मेदार मूकदर्शक बन अनभिज्ञता का रूप लिए हुए हैं। जबकि प्रावधान यह है कि गोदाम पर कोटेदारों को प्रत्येक बोरी का वजन करके दिया जाए। 

         जनपद के 16 विकासखंडो में भारतीय खाद्य निगम के गोदाम है। जहाँ से प्रति माह कोटेदारों को खाद्यान्न का उठान होता है। गेंहू, चावल की 50 किलो की बोरियां तौल में कहने को तो पचास किलो की होती हैं लेकिन कोई भी बोरी 45 से 47 किलो की ही निकलती है। बीच का राशन किसके खाते में जाता है। यह जांच का विषय बना हुआ है। गोदाम प्रभारियों की गर्दनों से लेकर पेट तक जो चर्बी बढ़ रही है। वह गरीबों का निवाला छीनकर बढ़ रही है। जनपद में 17 गोदाम हैं। इन गोदामों में शायद ही किसी केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक तराजू से तौल कर दिया जा रहा हो। चर्चा तो यह है कि बीच रास्ते में किसी धर्मकांटे पर तौल करायी जाती है। 

जहाँ पर घटतौली का खेल मिलीभगत से खेला जाता है। सम्बंधित उपजिलाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह इन गोदामों पर समय समय पर निरीक्षण करें लेकिन ऐसा प्रायः देखने को नही मिलता है। बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी, सफीपुर, हसनगंज, मियांगंज, हिलौली, औरास आदि विकासखंडो में यही आलम बना हुआ है। वहीं कोटेदारो ने दबी जुबान से स्वीकार किया कि अगर हम लोग घटतौली को लेकर कोई बात करते हैं। तो गोदाम प्रभारी से लेकर एसडीएम तक खफा हो जाते है।

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